बॉर्डर पर टेंशन, राष्‍ट्रपति से मिले पीएम मोदी

मोदी ने भारत के युवाओं को दिया बड़ा चैलेंज

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हाइलाइट्स

  • गलवान घाटी, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्‍स और पैंगोंग त्‍सो में आमने-सामने हैं दोनों देशों की सेनाएं
  • बॉर्डर पर तनाव के बीच राष्‍ट्रपति से मिलने पहुंचे पीएम मोदी, 30 मिनट तक हुई बातचीत
  • दो दिन पहले लेह‍ गए थे पीएम मोदी, बॉर्डर पर तैनात जवानों का बढ़ाया हौसला
  • बिना नाम लिए लगातार चीन पर हमले कर रहे हैं पीएम मोदी, बौखलाया हुआ है ड्रैगन

नई दिल्‍ली
चीन के साथ लगी सीमा पर तनाव के बीच रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। ANI के मुताबिक, करीब आधे घंटे की इस मुलाकात में दोनों के बीच राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय महत्‍व के कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दूसरी तरफ, उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी अहम ट्वीट किया है। उन्‍होंने लिखा, "भारत इतिहास के बेहद नाजुक मोड़ से गुजर रहा है। हम एक साथ कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन हमें जो चुनौतियां दी जा रही हैं, उसका सामना करने का हमारा निश्‍चय दृढ़ रहना चाहिए।"
लेटेस्ट कॉमेंटबिना नाम लिये संदेश पहुँचा ने की कलातो माहिर नेता ही कर सकता है. नाम ले कर करवाई सिर्फ ट्रंप जैसा राजनेता करता है.Ritesh Vermaसभी कॉमेंट्स देखैंअपना कॉमेंट लिखें
लेह जाकर सैनिकों का जोश बढ़ा चुके हैं पीएम
पीएम मोदी शुक्रवार को अचानक लेह पहुंच गए थे। नीमू में प्रधानमंत्री ने सेना, एयरफोर्स और ITBP के जवानों से मुलाकात की। उनका हालचाल जाना, उनका उत्‍साह बढ़ाया। ऐसा कर पीएम मोदी ने चीन को साफ संदेश दिया। पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) को बता दिया गया है कि भारत सरकार पूरी तरह अपने सैनिकों के साथ खड़ी है। पीएम मोदी को पहले सेना ने ताजा हालात के बारे में ब्रीफ किया, जिसके बाद उन्‍होंने फ्रंटलाइन पर तैनात जवानों से खुद बात की। इस दौरान पीएम जहां बंकरनुमा एक चैंबर में बैठे थे, वहीं जवान उनके सामने सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करते हुए कुर्सियों पर थे।
विस्‍तारवाद के बहाने चीन पर निशाना
लेह में पीएम मोदी ने चीन की 'विस्‍तारवादी' नीति पर हमला बोला था। उन्‍होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि 'विस्‍तारवाद का युग समाप्‍त हो चुका है और अब विकासवाद का वक्‍त है।' पीएम मोदी ने चीन को साफ शब्‍दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 'किसी पर विस्तारवाद की जिद सवार हो तो वह हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा है। इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट जाती हैं।'
भारत से रार चीन को महंगी, रुका 'विजय रथ'
नाम नहीं लिया फिर भी बौखलाया चीन
पीएम मोदी के लेह दौरे से सबसे बड़ा संदेश चीन को गया है। मोदी के नीमू दौरे से चीन को मिर्ची तो लगी है। तभी तो उनके विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा कि 'किसी को भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे तनाव और बढ़े।' चीन ने सीमा पर जैसी आक्रामक मोर्चाबंदी की है, उसे पीएम मोदी के इस दौरे से पता लग गया होता कि भारत पीछे हटने वाला नहीं। लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) की रक्षा के लिए भारत की सेना और राजनीतिक ताकतें भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चीन को यह भी संदेश गया होगा कि धीमे-धीमे कब्‍जा करने वाली उसकी रणनीति को भारत सहन नहीं करेगा। जिस तरह से सैनिकों के साथ पीएम मोदी ने बातचीत की, उससे साफ है कि भारत ने चीन के साथ बातचीत का रास्‍ता खुला छोड़ा है मगर किसी भी आक्रामक कार्रवाई का करारा जवाब देने को तैयार है।

अंडमान क्‍यों है इतना अहम?

  • अंडमान क्‍यों है इतना अहम?देश की पहली और इकलौती थियेटर कमान में सेना के तीनो अंग- आर्मी, नेवी और एयरफोर्स एक ही कमांडर के तहत आते हैं। यह आइलैंड ग्रुप दुनिया के बड़े ट्रेड रूट्स में से है। इसके जरिए बंगाल की खाड़ी, मालाका स्‍ट्रेट और साउथ-ईस्‍ट एशिया पर नजर रखी जा सकती है। हर साल मालाका स्‍टेट से होकर करीब 70 हजार जाहज गुजरते हैं। चीन पर दबाव बनाने में यह इलाका इसलिए भी काम आएगा क्‍योंकि उसकी तेल सप्‍लाई और ट्रेड का एक बड़ा हिस्‍सा इसी इलाके से होकर गुजरता है। जरूरत पड़ने पर हिन्‍द महासागर में चीन की विस्‍तारवादी मौजूदगी को अंडमान एंड निकोबार कमान से काउंटर किया जा सकता है। यहां पर तीसरा एयरबेस भी तैयार होने जा रहा है।
  • A&N कमान के तहत आते हैं ये बेसभारत ने एयरफोर्स और नेवल बेस के साथ-साथ अंडमान में लॉजिस्टिक्‍स सपोर्ट के लिए भी बेस बनाया है। यहां पर लॉजिस्टिक्‍स के लिए INS करदीप और INS जारवा तैनात हैं। इसके अलवा दो एयरफोर्स बेस हैं और दो नेवल एयर स्‍टेशन। इसके अलावा वीर सावरकर इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर जॉइंट नेवल और एयरफोर्स बेस भी मौजूद है।
  • जापान के साथ अभ्‍यास से चीन को मैसेजपिछले महीने भारत और जापान की नौसेनाओं ने अंडमान में ही अभ्‍यास किया था। दोनों देशों के बीच यूं तो सैन्‍य अभ्‍यास अक्‍सर होते रहते हैं मगर इस वक्‍त चीन ने भारत और जापान, दोनों के साथ तनावपूर्ण रिश्‍ते बना रखे हैं। साउथ और ईस्‍ट चाइना सी में चीन ने जैसे तेवर दिखाए, उससे भारत और जापान को साथ आना पड़ा। दिल्‍ली और टोक्‍यो ने इस नेवल एक्‍सरसाइज के जरिए दिखा दिया कि एग्रेशन के बजाय डिप्‍लोमेसी की जरूरत है। इस अभ्‍यास से यह भी संकेत मिलते हैं क्‍वाड देशों का ग्रुप वापस आ सकता है। हिन्‍द महासागर में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्‍ट्रेलिया का यह इनफॉर्मल ग्रुप चीन पर पर्याप्‍त दबाव बना सकता है।
  • चीन को घेरने में बड़ा काम आ सकता है अंडमानअंडमान निकोबार की लोकेशन उसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। कई एक्‍सपर्ट मानते हैं कि इस इलाके जरिए चीन को काबू में रखना आसान है। एक पूर्व डिप्‍लोमेट ने अपने रिसर्च पेपर ने कहा था कि भारत को यह इलाका अमेरिका, जापान के लिए भी खोल देना चाहिए ताकि चीनी पनडुब्बियों को ट्रैक किया जा सके। चीन अपने एडवांस्‍ड सर्विलांस जहाजों के जरिए हिन्‍द महासागर में मौजूद भारतीय नेवल बेसेज पर नजर रख रहा है, इंटेलिजेंस ने ऐसी वॉर्निंग दी है। ऐसे में अंडमान की थियेटर कमान में मौजूद रिर्सोसेज का अधिकतम इस्‍तेमाल करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
  • ऑस्‍ट्रेलिया बन सकता है भारत का सबसे अहम पार्टनरअगर चीन के साथ भारत के रिश्‍ते और खराब होते हैं और जंग की स्थिति बनती है तो अंडमान कमान की अहमियत कई गुना बढ़ जाएगी। उस सूरत में ऑस्‍ट्रेलिया हमारे बड़े काम आ सकता है। हिन्‍द महासागर में अंडमान द्वीप समूह और ऑस्ट्रेलिया के कोकोज आइलैंड की लेाकेशन ऐसी है कि वो दोनों देशों को रणनीतिक रूप से एडवांटेज देते हैं। फिलहाल ऑस्‍ट्रेलिया के साथ हमारे रिश्‍ते उतने मजबूत नहीं है क्‍योंकि ऑस्‍ट्रेलिया का ध्‍यान प्रशांत महासागर में ज्‍यादा है। दोनों आइलैंड्स हिन्‍द महासागर के कई चोकपॉइंट्स और ट्रेडिंग रूट्स के करीब हैं, युद्ध की सूरत में ऑस्‍ट्रेलिया की मदद से चीन को चारों तरफ से हिन्‍द महासागर में घेरा जा सकता है। लिए
  • यहां है चीन की कमजोर नस...चीन का अधिकतर इम्‍पोर्ट मिडल ईस्‍ट और अंगोला से आता है। ड्रैगन का 80 फीसदी से ज्‍यादा तेल मालाका स्‍ट्रेट से होकर गुजरता है। सुमात्रा और मलय पेनिनसूला के बीच स्थित इस खाड़ी के पूर्वी सिरे पर सिंगापुर है। वह अमेरिका का खास सहयोगी और नेवल ड्रिल्‍स में अधिकतर साथ देता है। किसी संघर्ष की स्थिति में मालाका खाड़ी बेहद अहम चेकपॉइंट बन जाती है। इसे ब्‍लॉक कर चीन के एनर्जी रिर्सोसेज को तगड़ी चोट पहुंचाई जा सकती है। जो दूसरा रूट चीन को लेना पड़ेगा, उससे उसे करीब 220 बिलियन डॉलर का अतिरिक्‍त खर्च उठाना पड़ सकता है। चीन इस इलाके पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है मगर तब तक यह इलाका उसकी कमजोर नस की तरह है जिसे जरूरत पड़ने पर दबाया जा सकता है।

'हम बांसुरी वाले कृष्‍ण के उपासक, सुदर्शन चक्रधारी के भी'
सैनिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "यह भूमि उनके बलिदानों को याद रखेगी। आपने हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।" मोदी ने कहा, "लद्दाख से लेकर कारगिल तक आपके साहस को सभी ने देखा है। लद्दाख भारत का ताज है और यह भूमि हमारे लिए पवित्र है। हम देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार हैं। दुनिया भारत की ताकत को जानती है, हमारे दुश्मनों के कपटपूर्ण मंसूबे सफल नहीं होंगे।" उन्होंने यह संदेश भी दिया कि भारत के संयम को अन्यथा नहीं देखा जाना चाहिए। मोदी ने कहा, "हम वो लोग हैं, जो बांसुरी बजाने वाले भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं, लेकिन हम वो लोग भी हैं जो भगवान कृष्ण को मानते हैं, जिन्होंने सुदर्शन चक्र धारण किया था।"

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